भक्तन के हो सदा सहारे

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maharajjiENGLISH TRANSLATION AT THE END OF THIS LEELA 

मैं पवन सिंह, बाबा की उपस्थिति का प्रत्यक्ष अनुभव करके लौटा हूँ l  मैं बाबा पर लखनऊ से कैंची धाम तक स्वेच्छा से एक ट्रेवल शो बना रहा हूँ  l

रास्ते भर जो भी मेरी टीम ने अनुभव किया वो अकल्पनीय था मेरे लिए   l   ये अनुभव  5  और 6  अप्रैल  2018  के हैं  l याद करता हूँ तो आँखे नम हो जाती हैं  l

 

 जब लखनऊ से हल्द्वानी पहुँचे तब तक शाम के 7:30 बज चुके थे। भवाली पहुँचते-पहुंचते रात के 12 बज चुके थे।

रास्ते पर चाय-पानी और होटल की दुकानें बंद हो चुकी थीं। मैंने और कैमरामैन ने तय किया कि रात में भी पहाड़ के कुछ नजारे, रात में सोया हुआ शहर और ऊंचाई से रात में बिजली की रौशनी से टिमटिमाते पहाड़ी कस्बों व शहरों को शूट करेंगे।

थकान बहुत थी। होटल- रेस्टोरेंट बंद हो चुके थे। हमारे ड्राइवर ने बाईपास होते हुए भवाली का सफर तय करने के लिए दो-राहे से आगे गाड़ी बढ़ा दी।

तभी एक आदमी ने हाथ देकर गाड़ी रुकवाई और कहाँ वापस बाजार से होकर जाएँ , चाय वहां मिल जाएगी।

इसके बाद वह आदमी वहां से चला गया। वाकई एक खूबसूरत रेस्टोरेंट का शटर गिरने ही जा रहा था। हम लोग पहुँच गए। मजेदार बात यह कि उसके किचेन में केवल हम लोगों के लिए चाय बनाने भर का ही दूध शेष था।

रात दस बजे के बाद फिर से सफर शुरू किया। बहुत ही नया अनुभव था। भीमताल की रात की खूबसूरती कमाल की थी।

रात 12 बजे भवाली पहुँचे तो चारों ओर सन्नाटा। हम लोग तय कर चुके थे कि कार में ही बैठे-बैठे सो जाएंगे। खाना तो मिलने से रहा।

फिर अचानक सीटी बजाता एक चौकीदार डंडा पटकता हुआ आया। बोला होटल चाहिए? मैंने कहा हाँ। वह बोला-गाड़ी मोड़ कर मेन बाजार वाले रास्ते पर जाएं कमरा मिल जाएगा।

हम लोग होटल ट्य्लिप के सामने पहुँचे तो उसका मैनेजर रिसेप्शन के बाहर ही खड़ा था। उसने कहा कि रूम तो खाली नहीं हैं लेकिन रूकने की अच्छी व्यवस्था देगा।

मैनेजर ने रात 12 बजे ही  किचेन खुलवाकर हम लोगों के लिए गरम-गरम रोटियां सिंकवाई, फ्राई दाल और सब्जी बनवाई। रात एक बजे खाना खाया और पास में ही एक निहायत ही खूबसूरत बंगले में बहुत ही आरामदेह कमरे मिल गए।

सुबह कैंची धाम के लिए निकले ही थे कि बंगले के बाहर एक बुजुर्ग लाठी लिए मार्निंग वाॅक से वापस लौट रहे थे।

ड्राइवर कार का शीशा साफ कर रहा था। उसके पास पहुँच कर बोले-स्टेप्नी बनवा लेना नहीं तो पहाड़ पर दिक्कत होगी। ड्राइवर ने कहा- सर वो पहले से ही ठीक है।

वो बुजुर्ग तो वहां से चले गए लेकिन मैंने जिद करके स्टेप्नी चेक करने को कहा। ड्राइवर ने देखा तो वह पंचर थी। थोड़ी ही दूर पर एक पंचर की दुकान दिखी। स्टेप्नी बनी और  जैसे ही बाबा के मंदिर के पास ऊंचाई पर पहुंच कार का पिछला पहिया पंचर हो गया। पहिया बदला और फिर से काम पर लग गये  l

ये इत्तिफाक भी हो सकता है  लेकिन जब बार-बार कोई आकर मदद के लिए सामने आ जाए तो ये इत्तिफाक नहीं हो सकता  l वैसे श्रद्धा  और विश्वास शब्दों के दायरे से बाहर होते हैं  l फिर से शूट शुरू कर रहा हूँ l 

।।श्री हं हं हनुमंत्ये नमः।। बाबा नीब करौरी के चरणों में शत्-शत् नमन ।।

 

I Pawan Singh,  have recently  directly experienced Baba's presence.  I am making a travel show from Lucknow to Kanchi  Dham voluntarily. Whatever my team experienced on the way,  was unimaginable for me. These experiences are between  5 and 6 April 2018. My eyes become wet when I remember them.

When we  reached Lucknow from Haldwani, it was 7:30 in the evening.  At  reaching Bhawali, it was 12 o'clock in the night. Tea shops  and hotels  were closed on the way.  I and my cameraman decided that we will shoot the scenes of the mountains and  the hill town shimmering in the night lights. We were extremely tired.  Hotels and restaurants had closed by this time. Our driver drove forward  towards  Bhawali  via by pass. Then a man stopped the car by hand gesture and said, “Go back through the market, tea will be there.” After this, the man left from there. I saw someone  opening the shutter of a  beautiful restaurant. We reached there. The interesting thing is that in their kitchen they had just  enough milk left to prepare tea for all of us.  

After ten O'clock in the night, we started the journey again.It  was a very new experience. The beauty of the night of Bhimtal was amazing.  When we reached Bhawali at midnight, there was complete silence all around. Since we had lost all hope of getting food, we decided to sleep in the car.  Then suddenly we noticed a watchman with a stick in his hand, come towards us. He was  blowing his whistle.  “Need a hotel ?” I said, “Yes.”  He said, “Drive back on the road to the main market. You will get a room.”

We reached hotel Tulip. The manager who stood   at the reception  said, “Room is not available but I will make good arrangement for your stay.” The manager got the kitchen opened, got fresh chapatis, daal fry and vegetable cooked for us.  We ate dinner at 1' O clock, and got  very comfortable rooms  in a beautiful bungalow nearby.  In the morning, we had just started for Kainchi Dhaam when we saw an elderly person with a walking stick,  right outside the bungalow. He was  returning from morning walk.  Our  driver was cleaning the car's glass.  The old man approached the driver and told him to check and  keep the Stepney ready as it was a difficult hilly  terrain.  The driver replied it was fine.  The old man went away but I insisted that the Stepney be checked. The driver saw that it was punctured.  There was a puncture shop a short distance away.  Stepney was  repaired,  and as soon as we  reached at some height near  the temple of Baba, the rear tyre  punctured. The tyre was changed and we started again.

It could be a coincidence too but whenever we needed help, we got it in unexpected ways. So it can’t be a coincidence.

By the way, devotion and faith are out of the realm of words. I am starting to shoot again.

Shree hum   hum  Hanumantai Namah …. I bow at the feet of Baba Neeb Karori ……