महाराजजी ने मृतकों को उठाया

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neebkaroribabaयह कहानी बहुत गूढ़ है l  

बाबाजी को पास के एक गाँव का दौरा करने की आदत थी l  एक शाम वे एक भक्त के घर पहुँचे , जहाँ वे अक्सर भोजन किया करते थे l 

 घर की महिला फूट फूट कर रोते हुए बाहर आयी और बोली, "जो व्यक्ति आपको भोजन परोसा करता था वह वहाँ पड़ा है l"  वह मरा पड़ा था  और जो लोग उसका अंतिम संस्कार करने की व्यवस्था करने आये थे, उनसे घिरा हुआ था l बाबाजी उस आदमी के पास बैठ गए, उन्होंने अपने कम्बल का एक हिस्सा आदमी के शरीर पर डाला और अपने आस पास के लोगों से बात करने लगे l 

हर कोई बाबाजी को देख और सुन रहा था l  कुछ देर बाद बाबाजी उठे और बोले कि वे अपना भोजा कहीं और कर लेंगे l किसी ने भी उन्हें रोकने के बारे में नहीं सोचा l  

जब बाबाजी वहाँ से चले गए तो वहाँ  पड़ा हुआ वह आदमी वहाँ से ऐसे उठा  जैसे कि नींद से उठा हो  और पूछने लगा, "मैं यहाँ क्यों पड़ा हूँ ?" हर कोई इतना चकित था कि कोई जवाब नहीं दे पाया l